
झाँसी जनपद का यह अंचल पिछड़ा एवं असेवित कहलाता है। आर्थिक विषमता, आवागमन की असुविधा एवं प्रेरणा व मार्गदर्शन के अभाव में ग्रामीण परिवेश के नौजवान छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। जिससे सम्पूर्ण क्षेत्र रोजगार, विकास एवं समृद्धि में पिछड़ता जा रहा है। उच्च शिक्षा एक ऐसा प्रतिमान है, जिसको प्राप्त करके यहाँ के प्रतिभाशाली नवयुवाओं व नवयुवतियों की प्रतिभा से यह क्षेत्र प्रगतिशील बन सकता है, जो कि मेरा एक अति महत्वपूर्ण स्वप्न है। इसी स्वप्न को पूरा करने के लिए महाविद्यालय रूपी मंदिर का निर्माण किया गया है। जिसमें स्नातक स्तर पर कला, वाणिज्य एवं विज्ञान संकाय संचालित है। इसके संचालन के बाद भी क्षेत्र के स्नातक उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के लिये परेशान रहते थे। इस परेशानी को महसूस कर विगत सत्र से परास्नातक स्तर पर एम.एस.-सी. एवं एम.ए. कक्षाओं की सम्बद्धता शासन से प्राप्त हो गयी है एवं नियमित रूप से कक्षाएं संचालित हो रही हैं। अध्ययनरत युवा छात्र-छात्राओं से मेरा विनम्र अनुरोध है कि वे इस वीर प्रसूता मातृभूमि को समृद्ध करने के लिए युवा शिक्षा के केन्द्र में मेहनत एवं लगन से शिक्षा ग्रहण करें तथा बुन्देलखण्ड की गौरवशाली ऐतिहासिक परम्पराओं को पुनर्जीवित करने के आधार स्तम्भ बनकर समाज और राष्ट्र को सबल करें। विकसित एवं समृद्ध राष्ट्र निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि उसके युवा मूल्यपरक आदर्शों, तथा उत्कृष्ट शिक्षा से युक्त हों। इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिये प्रबंध-समिति के गणमान्य सदस्य, माननीय अभिभावक, शिक्षक, शिक्षणेतर कर्मचारी एवं विद्यार्थी मिलकर महाविद्यालय के गौरव गरिमा हेतु कृत संकल्पित हों और इस महाविद्यालय को उत्कृष्टता, गुणवत्तापरक आदर्श प्रदान करने का दृढ़ निश्चय करें ताकि हम मानव जीवन को सार्थक बनाने के साथ-साथ राष्ट्र को भी गौरवान्वित कर सकें। इसी आशा एवं विश्वास के साथ! दीप नारायण सिंह.
"I welcome each one of you to our institute where, the latest technology, innovative teaching methodologies, and quality education, are blended to create a unique learning experience."